जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर गंगा स्नान व पूजन हेतु उमड़ा व्रतियों का सैलाब, संतान की लंबी आयु के लिए माताओं ने रखा निर्जला व्रत..
एक्सप्रेस न्यूज़, बक्सर: बिक्रम संवत के आश्विन माह में कृष्ण-पक्ष के सातवें से नौवें चंद्र दिवस पर तीन-दिवसीय जितिया व्रत किया जाता है. पुत्रों की सलामती के लिए रखा जाने वाला जिउतिया या जीवित्पुत्रिका व्रत 10 सितंबर को है, 2 दिन तक चलने वाले इस कठिन व्रत की शुरुआत बुधवार को नहाए-खाए से हो गई है. आज उपवास करने वाले लोग पूरे दिन निर्जला व्रत रहेंगे और कल पारण करेंगे. संतान की लंबी उम्र की प्रार्थना करने करते हुए सुहागिन महिलाओं ने आज जितिया का व्रत रखा है. जिउतिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है. जिउतिया व्रत मुख्यरूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. जिउतिया व्रत को मुख्य रूप से संतान की सुख और समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है.
इस दौरान विभिन्न घाटों पर पुलिस की तैनाती की गई थी. जीवित्पुत्रिका करने वाले व्रतियों में वृद्ध महिलाएं भी शामिल थी. जो विभिन्न वाहनों के माध्यम से गंगा घाटों पर पहुंची थी. इस दौरान पूरे दिन मॉडल थाना चौक से लेकर रामरेखा घाट पर जाने वाले मार्ग पर व्रतियों की चहलकदमी रही.
सनातन धर्म में जिउतिया एक कठिन त्योहार है. इसमें महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं. जिसके अंतर्गत पारंपरिक विधि-विधान से पूजा अर्चना कर महिलाएं संतान की सुरक्षा की कामना करती हैं. साथ ही साथ इस व्रत की मान्यता है कि इस व्रत को करने से पुत्रों की आयु लंबी होती है. इस व्रत की कथा महाभारत काल से संबंधित है. धार्मिक कथाओं के अनुसार महाभारत के युद्ध में अपने पिता की मौत का बदला लेने की भावना से अश्वत्थामा पांडवों के शिविर में घुस गया. शिविर के अंदर पांच लोग सो रहे थे. अश्वत्थामा ने उन्हें पांडव समझकर मार दिया, परंतु वे द्रोपदी की पांच संतानें थीं. फिर अुर्जन ने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उसकी दिव्य मणि ले ली.
अश्वत्थामा ने फिर से बदला लेने के लिए अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चें को मारने का प्रयास किया और उसने ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ को नष्ट कर दिया. तब भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा की अजन्मी संतान को फिर से जीवित कर दिया. गर्भ में मरने के बाद जीवित होने के कारण उस बच्चे का नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया. तब उस समय से ही संतान की लंबी उम्र के लिए जितिया का व्रत रखा जाने लगा.
जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर स्टेशन रोड से लेकर रामरेखा घाट तक विभिन्न जगहों पर अस्थायी दुकाने फुटपाथ पर सजी थी. जहां, पूजन सामग्री के साथ श्रृंगार प्रसाधन के समान बेचे जा रहे थे. रामरेखा घाट के दुकानदार भी पूरे उत्साह में नजर आए.




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