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फेफड़ों के अलावा अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है टीबी का जीवाणु..



- टीबी की सम्पूर्ण जानकारी लोगों के लिए बहुत जरूरी : डॉ. नरेश.
- सक्रिय टीबी का मरीज दूसरे स्वस्थ व्यक्तियों को भी कर सकता है संक्रमित.
एक्सप्रेस न्यूज़, बक्सर: टीबी एक गंभीर  संक्रामक बीमारी है. मरीजों को टीबी की जानकारी नहीं होने के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यदि उन्हें पूर्व से ही टीबी के लक्षणों और उसकी गंभीरता  की जानकारी होगी, तब वह समय पर इसकी पहचान और इलाज दोनों कर सकेंगे. टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु के संक्रमण के कारण होती है. ज्यादातर मामलों में यह फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है. जब टीबी से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई उत्पन्न होता है, जो हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है. ये ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई कई घंटों तक वातावरण में सक्रिय रहते हैं और एक स्वस्थ्य व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद उसे संक्रमित करते हैं. 
ज्यादातर लोग लेटेंट टीबी से होते हैं ग्रसित :
डॉ. नरेश कुमार ने बताया टीबी लेटेंट (सुप्त) व एक्टिव (सक्रिय) दोनों अवस्था में होता है. सुप्त अवस्था में संक्रमण तो होता है, लेकिन टीबी का जीवाणु निष्क्रिय अवस्था में रहता है और कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं. अगर सुप्त टीबी का मरीज अपना इलाज नहीं कराता है, तो सुप्त टीबी सक्रिय टीबी में बदल सकती है. लेकिन सुप्त टीबी ज्यादा संक्रामक और गंभीर  नहीं है. उन्होंने बताया ज्यादातर लोग सुप्त टीबी से संक्रमित होते हैं.  सक्रिय टीबी की बात की जाए तो इस अवस्था में टीबी का जीवाणु शरीर में सक्रिय अवस्था में रहता है, यह स्थिति व्यक्ति को बीमार बनाती है. सक्रिय टीबी का मरीज दूसरे स्वस्थ्य व्यक्तियों को भी संक्रमित कर सकता है.
टीबी (क्षय रोग) के प्रकार :
 पल्मोनरी टीबी - अगर टीबी का जीवाणु फेफड़ों को संक्रमित करता है तो वह पल्मोनरी टीबी  कहलाता है. टीबी का बैक्टीरिया 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में फेफड़ों को प्रभावित करता है. इसके लक्षणों में सीने में दर्द और लंबे समय तक खांसी व बलगम होना शामिल हैं. कभी-कभी पल्मोनरी टीबी से संक्रमित लोगों की खांसी के साथ थोड़ी मात्रा में खून भी आ जाता है.



एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी - टीबी का जीवाणु यदि फेफड़ों की जगह शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करता है तो इसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है. ज्यादातर मामलों में संक्रमण फेफड़ों से बाहर भी फैल जाता है और शरीर के दूसरे अंगों को प्रभावित करता है. जिसके कारण फेफड़ों के अलावा अन्य प्रकार के टीबी हो जाते हैं.
ड्रग रेजिस्टेंस टीबी के प्रकार :
 मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी- मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी में फर्स्ट लाइन ड्रग्स का टीबी के जीवाणु पर कोई असर नहीं होता है. अगर टीबी का मरीज नियमित रूप से टीबी की दवाई नहीं लेता है या मरीज द्वारा जब गलत तरीके से टीबी की दवा ली जाती है या फिर टीबी का रोगी बीच में ही टीबी के कोर्स को छोड़ देता है, तो रोगी को मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी हो सकती है. इसलिए टीबी के रोगी को डॉक्टर के दिशा निर्देश में नियमित टीबी की दवाओं का सेवन करना चाहिए.

 एक्सटेनसिवली ड्रग रेजिस्टेंस टीबी- इस प्रकार की टीबी मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी से ज्यादा गंभीर  होती है. एक्सटेनसिवली ड्रग रेजीस्टेंट टीबी में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस टीबी के उपचार के लिए प्रयोग होने वाली सेकंड लाइन ड्रग्स का टीबी का जीवाणु प्रतिरोध करता है.


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