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गांजा तस्करी के आरोप में रंगे हाथ पकड़े गए सात अभियुक्तों को 10 साल की सजा व प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये का लगा जुर्माना..



एक्सप्रेस न्यूज़, बक्सर: अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय धीरेंद्र बहादुर सिंह की अदालत ने गांजा तस्करी के आरोप में रंगे हाथ पकड़े गए सात अभियुक्तों को सात साल कारावास एवं प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है. जुर्माने की राशि नहीं अदा करने पर कारावास की अवधि एक साल और बढ़ा दी जाएगी. इस संदर्भ में जानकारी देते हुए विशेष लोक अभियोजक सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 के अप्रैल माह की 23 तारीख को गुप्त सूचना के आलोक में मुफस्सिल थाना व नगर थाने की पुलिस टीम की संयुक्त कार्रवाई में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 अंतर्गत परमानपुर मोड़ के समीप एक ट्रक तथा स्कॉर्पियो को रोका गया. तलाशी लेने पर ट्रक में जहां 6 क्विंटल 67 किलो गांजे की बरामदगी की गई. वहीं, स्कॉर्पियो में 82 किलो गांजा बरामद हुआ था. ट्रक तथा स्कॉर्पियो में क्रमश चार-चार लोग बैठे हुए थे. जिन्हें तुरंत ही गिरफ्तार कर लिया गया. वहीं, इस मामले में मोबाइल फोन पर लाइनर की भूमिका निभाने तथा पकड़े गए अभियुक्तों द्वारा बताए गए कथित गांजा व्यवसायियों को मिलाकर कुल 11 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई. बाद में पुलिसिया अनुसंधान में सात लोगों को दोषी पाते हुए बुधवार को न्यायालय के द्वारा सजा सुनाई गई. इसके अतिरिक्त एक अन्य अभियुक्त का ट्रायल अलग चल रहा है.

विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि घटना के वक्त पकड़े गए लोगों ने बताया था कि बिहार के मधुबनी के रहने वाले नगीना राय तथा भोजपुर जिले के मसाढ के रहने वाले जय प्रकाश राय के द्वारा गांजे का अवैध कारोबार किया जाता है. उन्हीं के कहने पर गांजे की यह खेप लेकर वह लोग जा रहे थे. पुलिस ने मामले का अनुसंधान शुरू किया जिसके बाद न्यायालय में रिपोर्ट जमा कराई गई. जिसके अवलोकन के पश्चात न्यायाधीश के द्वारा उत्तर प्रदेश के रहने वाले ट्रक चालक अमरेंद्र पाठक तथा खलासी अमित वर्मा के साथ साथ भोजपुर जिले के गौसगंज मसाढ तथा बक्सर जिले के बलिहार के रहने वाले राजू सिंह, विकास सिंह, सेठी सिंह, उदय सिंह तथा मृत्युंजय सिंह को दोषी पाया गया. जिनके विरुद्ध सजा सुनाई गई. सभी को 10 साल की सजा के साथ-साथ एक-एक लाख रुपये का जुर्माना देना होगा. वहीं, मामले में एक अन्य अभियुक्त चंदन सिंह का अलग से ट्रायल चल रहा है.



त्रुटिपूर्ण के कारण मुख्य अभियुक्त पकड़ से बाहर: एपीपी

विशेष मुख्य अभियोजक सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने पुलिस पर लापरवाही बरतने और आरोपियों के मेल में आकर उन्हें लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि मामले में त्रुटिपूर्ण अनुसंधान होने के कारण मुख्य कारोबारी जय प्रकाश सिंह तथा नगीना राय को न्यायिक लाभ मिल गया है. जबकि, पुलिस ने अपने बयान में यह बताया था कि मोबाइल सीडीआर में इन लोगों की भूमिका भी स्पष्ट रूप से सामने आई है. लेकिन, पुलिस द्वारा इस मामले में सीडीआर न्यायालय में नहीं जमा कराने के कारण दोनों को न्यायालय से राहत मिल गई.






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