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सौ में लगभग 61 महिलाएं स्वयं लेती हैं परिवार नियोजन का फैसला, पुरुषों ने भी थामी कमान, बढ़ा कंडोम के इस्तेमाल के प्रति रुझान ..




- नाबालिग उम्र में विवाह के मामलों में भी आई कमी  
- एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट में उजागर हुई जिले की स्वास्थ्य संबंधी उपलब्धियां 
एक्सप्रेस न्यूज़, बक्सर: परिवार नियोजन कार्यक्रमों के द्वारा जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया गया अनवरत प्रयास अब रंग लाने लगा है. जिले की महिलाएं और पुरुष दोनों परिवार नियोजन कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर सफल करने में विभाग का साथ दे रहे हैं. हाल ही में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5(2019-20) द्वारा जारी किए गए नए आंकड़ों के अनुसार जहां कंडोम का उपयोग पहले की अपेक्षा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा है, वहीं महिलाओं में परिवार नियोजन के साधनों के प्रतिरुझान बढ़ गया है. महिलाओं में कम उम्र में विवाह के मामलों में कमी देखने को मिल रही है.
नियोजन कार्यक्रमों को समुदाय तक लाने में जिला स्वास्थ्य विभाग कर रहा लगातार प्रयास :
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया परिवार नियोजन कार्यक्रमों को हर घर तक पहुँचाने को लेकर विभाग लगातार प्रयास कर रहा है. आने वाले दिनों  में भी  स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मीगण विभाग द्वारा दिये गए स्वास्थ्य सुविधाओं को समुदाय तक पहुँचाने को प्रतिबद्ध हैताकि जिले के सभी स्वास्थ्य मानकों में लगातार सुधार देखने को मिले.
परिवार नियोजन के सभी साधनों में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी : 
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार जिले की 60. 5 प्रतिशत महिलाओं ने परिवार नियोजन के तरीकों को अपनाया है. एनएफएचएस-4(2015-16) में केवल 35 प्रतिशत महिलाएं इनके प्रति दिलचस्पी दिखाती थीं. नियोजन के आधुनिक साधनों की बात करें तो एनएफएचएस-4 में 33.3 प्रतिशत था, जो बढ़कर एनएफएचएस-5 में 44. 6 प्रतिशत हो गया है. यही नहीं महिला बांध्याकरण में भी लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखी है और  29. 8 प्रतिशत से 35.1 प्रतिशत हो गया है. कॉपर-टी और गर्भनिरोधक सुई(अंतरा) के इस्तेमाल में भी क्रमशः 0.5 प्रतिशत से 1 प्रतिशत तथा 0.6 प्रतिशत से 1.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. जबकि छाया, माला-डी और दूसरी गर्भनिरोधक गोलियों में दोगुने से भी ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है. पिछले पाँच साल की तुलना में यह 0.8 प्रतिशत से 2.4 प्रतिशत हो गयी है. परिवार नियोजन साधनों के ये बढ़े हुये आंकड़े जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रमों के काफी महत्वपूर्ण होने को प्रमाणित करते हैं.
सामुदायिक जागरूकता से महिलाओं के कम उम्र में  विवाह में आई कमी :
एनएफएचएस-5  के आंकड़ों से जिला में 20 से 24 साल की वैसी महिलाएं जिनकी शादी 18 वर्ष से कम में हुई है, उनमेंकमी दिखी है. एनएफएचएस-4 2015-16 में जहां 37.5 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 वर्ष से कम में हो जाती थी, अब कम होकर 30.8 हो गयी है. 
पुरुषों में कंडोम का इस्तेमाल 2 गुना बढ़ा: 
हालांकि परिवार नियोजन को लेकर पुरुष नसबंदी का आंकड़ा अभी भी संतोषजनक नहीं है. किन्तु, कंडोम के इस्तेमाल में इस्तेमाल में दोगुने से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है. एनएफएचएस-4(2015-16) के सर्वेक्षण में जहां जिले के 100 में से केवल 1.5 पुरुष कंडोम का इस्तेमाल कर रहे थे. वहीं एनएफएचएस-5  के मुताबिक अब जिला में 3.8 प्रतिशत पुरुष कंडोम का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस वृद्धि में प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगाये गये कंडोम बॉक्स द्वारा निशुल्क कंडोम उपलब्धता का भी महत्वपूर्ण योगदान है.





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