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स्वस्थ बचपन की शुरुआत के लिए शिशु का संपूर्ण टीकाकरण जरूरी



- राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण-4 के अनुसार बक्सर जिले में 63.9 प्रतिशत बच्चों का ही हो पाता है संपूर्ण टीकाकरण
- टीका लेने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का होता है विकास
- टीकाकरण के समय अपनाएं कोविड अनुरूप आचरण

एक्सप्रेस न्यूज़, बक्सर: प्रत्येक साल जिले के कई बच्चे संपूर्ण टीकाकरण का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं. ऐसे में बच्चों के अभिभावकों को प्रेरित करने के लिए स्वास्थ्य व आईसीडीएस विभाग कई कार्यक्रम संयुक्त रूप से चलाता है. ताकि, अधिक से अधिक अभिभावक अपने बच्चों को समय पर टीका लगवा कर उन्हें बीमारियों से बचा सके. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार जो बच्चे टीकाकरण से वंचित रहते हैं, उनमें प्रतिरक्षित बच्चों की तुलना में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम जाती है. इसलिए बच्चों में सही समय से टीकाकरण जरुरी है. राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण-4 के अनुसार बक्सर जिले में 63.9 प्रतिशत बच्चों का ही संपूर्ण टीकाकरण हो पाता है. जिले में दो साल तक के 93.5 प्रतिशत बच्चों का सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण हुआ है. जबकि महज 6.5 प्रतिशत बच्चों ने निजी अस्पतालों व संस्थानों में टीका लगवाया है.
बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है:
प्रभारी जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. शालिग्राम पांडेय ने बताया स्वस्थ बचपन की शुरुआत के लिए शिशु का संपूर्ण टीकाकरण बहुत ही जरूरी है. टीकाकरण एक प्रक्रिया है, जिसमें टीका के माध्यम से बच्चों को संक्रामक रोगों व गंभीर बीमारियों को सुरक्षित किया जाता है. टीका लेने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है और बच्चों को समय से प्रतिरक्षित करने से सामान्य बीमारियों में कमी आती है. शिशु मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से अनेक ऐसी बीमारियां हैं, जिनको नियमित टीकाकरण से ही रोका जा सकता है. लेकिन, इसके लिए सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चों को सही समय पर सभी टीका दिया जाए. बच्चों में होने वाले पोलियो, टीबी, खसरा व रूबेला, निमोनिया, डायरिया, हैपेटायटीस-बी, गलाघोंटू, काली खांसी, दिमागी बुखार एवं टीटनेस जैसे कई गंभीर रोगों से टीकाकरण बचाव करता है. इसके अलावा शिशु मृत्युदर में भी कमी लाता है.
सप्ताह में दो दिन आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिए जाते हैं टीके : 
डॉ. शालिग्राम पांडेय ने बताया विभाग के निर्देश पर जिले में सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रत्येक सप्ताह बुधवार व शुक्रवार को ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस मनाया जाता है. इसे आरोग्य दिवस के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान 5 साल तक के बच्चों को नियमित टीकाकरण सारणी के अनुसार टीका लगाया जाता है. आशा, आंगनबाड़ी व एएनएम आरोग्य दिवस को सफल बनाने में योगदान देती हैं. जिले के सभी आशा एवं एएनएम को टीकाकरण के महता पर नियमित उन्मुखीकरण भी किया जाता है. गृह आधारित नवजात देखभाल कार्यक्रम के तहत आशाएं नियमित गृह भ्रमण करती हैं. वह नवजातों की देखभाल के साथ उनके परिजनों को टीकाकरण के विषय में भी जागरूक करती हैं.
टीकाकरण के समय अपनाएं कोविड अनुरूप आचरण:
डॉ. शालिग्राम पांडेय ने बताया आरोग्य दिवस के अवसर पर अथवा स्वास्थ्य केन्द्रों पर टीकाकरण के समय कोविड अनुरूप आचरण का पालन आपको संक्रमण से सुरक्षा देने में अहम् भूमिका निभा सकता है. टीकाकरण के लिए केंद्र पर जाते समय मास्क का प्रयोग, शारीरिक दूरी का अनुपालन और स्वच्छता का ध्यान रखकर खुद को और अपने परिजनों को कोविड के संक्रमण से बचाया जा सकता है.





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