बक्सर: लॉक डाउन के दौरान गरीब तबके के लोग जो दैनिक मजदूरी कर परिवार का जीवन यापन करते थे. उनके लिए दोनों समय का भोजन का व्यवस्था कर पाना विकट समस्या बन गई है. ऐसे में जिला प्रशासन के साथ-साथ सामाजिक संस्थाएं भी सामने आ रही है और जरूरतमंद लोगों को राशन सामग्री उपलब्ध करा रही है. महिला विकास सेवा संस्थान के द्वारा लॉक डाउन के विकट परिस्थिति में 51 जरूरतमंदों को चिन्हित कर राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई. वैश्विक स्तर पर पांव जमा चुके कोरोना वायरस से पूरा विश्व तबाही के दौर से गुजर रही है. जिसको देखते हुए भारत सरकार के द्वारा देश के पूरे राज्य में लॉक डाउन जारी कर दिया गया है. उस परिस्थिति में गरीबों एवं जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध कराकर महिला विकास सेवा संस्थान उनके लिए फरिश्ता बन कर सामने आया है. संस्था के संस्थापक गोविंद जयसवाल ने कहा कि अपने लिए तो सब जीते हैं मगर, दूसरों के लिए जीना बहुत बड़ा पुण्य का काम होता है .
वहीं, कई समाजसेवी संस्था लगातार जरूरतमंदों के सहायतार्थ आगे आ रहे हैं.
इसी क्रम में बताते चलें कि आज 3 अप्रैल को पहले से चिन्हित किए गए 51 गरीब परिवारों को महिला विकास सेवा संस्थान के द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते एवं कराते हुए शांति नगर तथा खलासी मुहल्ले में राशन सामग्री का वितरण किया गया. महिला विकास सेवा संस्थान के संयोजक गोविंद जयसवाल ने बताया कि लोगों को इस दौरान आटा,चावल,मसाला,सोयाबीन,आलू,नमक, दाल जैसे राशन सामग्री को एक थैला बनाकर 51 जरूरतमंद लोगों को बांटा गया.
वहीं, संस्था के संयोजक गोविंद जयसवाल ने बताया अगली बार फिर रविवार 5 अप्रैल को राशन सामग्री की वितरित कराई जाएगी. संस्थान के सभी लोग इस पुनीत कार्य में आगे आए जिसने महिला संस्थान की शिल्पी देवी, रीना शर्मा,चंदा बेगम,किरण जायसवाल,मीना देवी ,रानी पासवान ,अनिता देवी ,रेणु पासवान,मिना राजभर,बबन राजभर ,बबलू समेत संस्था के अन्य लोग मौजूद रहें.
वहीं, संस्था के मुख्य सहयोग करेमी कंचन देवी पति अरविंद जयसवाल ने बताया कि गौरतलब हो कि सरकार के साथ-साथ निजी संस्था के लोग भी इस महामारी के दौरान कई प्रकार से लोगों के सेवाओं के लिए सामने आए हैं. जो सरकार के कार्य में सहयोग के साथ साथ गरीबों की परेशानियों में मदद का काम कर रहे हैं. जिससे साबित होता है कि हमारे बिहार में कोरोना से जंग के लिए लगभग सभी लोग पूरी तरह से चुस्ती दुरुस्ती दिखाने लगे हैं.
- रोहित ओझा की रिपोर्ट.



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