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बीजेपी नेता प्रदीप राय पर पूर्व विधायक डुमरांव डॉ. अजीत ने बक्सर में पुश्तैनी भूमि पर अवैध कब्जा व जबरन निर्माण का लगया आरोप, प्रदीप राय ने भी दिया करारा जवाब।




- पीड़ित परिवार को जान माल कि धमकी देने का भी पूर्व विधायक ने लगाए आरोप.

- साहस है तो आमने-सामने बैठें, सारे कागजात देखकर सत्यता पर चर्चा करें- प्रदीप राय.

- सिविल कोर्ट, बक्सर में दर्ज है मामला फिर भी अवैध निर्माण कब्ज़ा है जारी.

एक्सप्रेस न्यूज़, बक्सर: डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजीत ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि भाजपा के भूमि एवं राजस्व मंत्री भूमाफियाओं पर कार्रवाई की बात करतें है दूसरी तरफ भाजपा के नेता ही जबरन जमीन कब्जा कर रहे हैं. भाकपा (माले) के डुमराँव से पूर्व विधायक डॉ० अजीत कुमार सिंह के साथ सुदामा उपाध्याय ने जिलाधिकारी, बक्सर से मिलकर जिला मुख्यालय स्थित नया बस स्टैंड बाइपास रोड (पेट्रोल पंप के पीछे) स्थित अपनी पुश्तैनी भूमि पर अवैध कब्जा और जाली दस्तावेज़ों के आधार पर भाजपा नेता प्रदीप राय द्वारा जबरन निर्माण कार्य पर रोक लगाने एवं न्यायालय के आदेशानुसार कार्रवाई करने तथा जान-माल की रक्षा की गुहार लगायी है. 

पीड़ित सुदामा उपाध्याय के अनुसार खाता संख्या 71/42, प्लॉट संख्या 321/938, रकबा 6 कट्ठा भूमि उनकी पुश्तैनी संपत्ति है, जिसका न तो उनके द्वारा और न ही उनके स्वर्गीय पिता द्वारा किसी को विक्रय या हस्तांतरण किया गया है. बावजूद इसके, प्रदीप कुमार राय एवं अखिलेश राय द्वारा जबरन कब्जा कर अवैध निर्माण कराया जा रहा है.


पीड़ित का आरोप है कि वर्ष 2016 में उनकी माताजी के नाम से फर्जी स्वीकृति पत्र बनाकर अंगूठा निशान लिया गया और उसी आधार पर अवैध बिक्री दिखाई गई, जो स्पष्ट रूप से जालसाजी का मामला है. जबकि उन्होने बताया है कि उनके माताजी का निधन 30 नवंबर 2013 को हीं हो गया है.

इस संबंध में सिविल कोर्ट, बक्सर में मामला दर्ज कराया गया, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 467 व 471 के तहत संज्ञान लिया गया है.  इसके बावजूद अवैध कब्जा व निर्माण जारी है. केस दर्ज होने के बाद से उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान-माल की धमकियाँ मिल रही हैं. जिससे पीड़ित ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अवैध कब्जा व निर्माण को तत्काल रोका जाए, दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए.


ऐसा ही मामला बक्सर के सोहनिपट्टी निवासी राजनकान्त उपाध्याय का भी है जिनका लालगंज मौजा के खाता संख्या 137/115 प्लॉट संख्या 653/485, रकबा 17 कट्ठा भूमि जो उनकी पुश्तैनी संपत्ति है को भी जबरन प्रदीप कुमार राय पिता कालिका राय द्वारा ओपन बिरला माइंड स्कूल में जबरन कब्जा कर मिला लिया गया है. जमीन नहीं देने पर जान-माल की लगातार धमकी मिल रही है.

इस संबंध में इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व विधायक डॉ० अजीत कुमार सिंह ने कहा कि यह मामला न केवल भूमि माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस को दर्शाता है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है. जिला के संबंधित उच्च अधिकारियों से पीड़ितों ने बार-बार न्याय की गुहार लगायी है, परंतु सभी अधिकारियों द्वारा कार्रवाई करने से साफ इंकार कर दिया गया है. इससे साबित होता है कि भूमाफियाओं का भय सिर्फ आम गरीब लोगों में ही नहीं बल्कि प्रशासनिक महकमों में भी व्याप्त है. बिहार  के माननीय मुख्यमंत्री, माननीय गृह मंत्री एवं माननीय भूमि एवं राजस्व मंत्री के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं. भूमाफियाओं का मनोबल सातवें आसमान पर है. हमारी माँग है कि भूमाफियाओं पर अविलंब कार्रवाई किया जाए तथा पीड़ितों के जान-माल की सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित की जाए. हमने जिला अधिकारी, बक्सर से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है. 


दूसरी तरफ प्रदीप राय ने भी पलटवार करते हुए पत्रकार से फोन पर बात कर एवं प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा है कि “चुनाव हारने के बाद पूर्व विधायक बौखला गए हैं. यदि उनके अंदर आमने-सामने बैठकर दस्तावेज जांचने की है हिम्मत तो आ सकते हैं. उन्होने जिला मुख्यालय स्थित नया बस स्टैंड बाइपास रोड की भूमि को लेकर चल रहे विवाद को लेकर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की सोची-समझी राजनीतिक साजिश बताया है. उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं. 


फोन पर बातचीत में प्रदीप राय ने बताया कि वह फिलहाल बक्सर से बाहर हैं और इसी का फायदा उठाकर उनके खिलाफ जानबूझकर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर माहौल बनाया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित जमीन से जुड़े सभी कागजात उनके पास पूरी तरह वैध, अधिकृत और नियमसम्मत हैं. यदि किसी को आपत्ति है तो न्यायालय का रास्ता खुला है, न कि मीडिया ट्रायल. 

प्रदीप राय ने पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुशवाहा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव में करारी हार के बाद वे बौखलाहट में अनर्गल आरोप लगा रहे हैं और अब कथित रूप से जमीन के कारोबार में भी सक्रिय हो गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर ऐसे विवाद खड़े किए जा रहे हैं ताकि निजी स्वार्थ साधा जा सके और राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखा जा सके.

 भाजपा नेता ने कहा, “जिन लोगों को जनता ने नकार दिया, वे अब सस्ती लोकप्रियता और निजी लाभ के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं. मेरे पास जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज वैध हैं। किसी भी जांच से मैं पीछे नहीं हटूंगा.”

इतना ही नहीं, प्रदीप राय ने पूर्व विधायक को खुली चुनौती देते हुए कहा कि मीडिया में बयानबाजी करने से बेहतर है कि वे आमने-सामने बैठकर जमीन के दस्तावेजों की जांच करें. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले जमीन और कागजात की सही जानकारी हासिल करें, उसके बाद आरोप लगाएं.

उन्होंने कहा कि “अगर उनमें साहस है तो आमने-सामने बैठें, सारे कागजात देखकर सत्यता पर चर्चा करें. सिर्फ प्रेस नोट जारी कर भ्रम फैलाने से सच्चाई नहीं बदलती.”

उन्होंने दोहराया कि किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा, जालसाजी, धमकी या जबरन निर्माण से उनका कोई लेना-देना नहीं है. पूरा मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया गया है. भाजपा नेता ने मीडिया से भी अपील की है कि किसी एक पक्ष के आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाए. उन्होंने भरोसा जताया कि न्यायालय में सच्चाई सामने आने पर सभी आरोप स्वतः समाप्त हो जाएंगे.

फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही किया जाएगा. हालांकि, इस जमीन के मामले को लेकर भाजपा नेता प्रदीप राय और पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुशवाहा आमने सामने जरुरत आ गए हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायलय के द्वारा और प्रशासनिक महकमे के द्वारा इस मामले आगे क्या संज्ञान लिया जाता है.



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