सिद्धनाथ घाट शिधेश्वर नाथ मंदिर के प्रांगण में 6 दिवसीय महालक्ष्मी यज्ञ एवं श्रीमदभागवत कथा का किया गया आयोजन।
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एक्सप्रेस न्यूज़, बक्सर: सिद्धनाथ घाट बक्सर शिधेश्वर नाथ मंदिर के प्रांगण में दिनांक 18 जनवरी से 23 जनवरी तक महालक्ष्मी यज्ञ एवं श्रीमदभागवत कथा का आयोजन किया गया है. जिसमें आज कथा श्रवण के लिए सैंकड़ो कि संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. जगतगुरु श्री श्री 1008 धर्मेंद्रआचार्य जी महाराज के श्रीमुख से आज श्रीमदभागवत कथा का रसपान कराया गया तथा गंगा के पूर्व के नाम और गंगा कि पूरी कहानी का रसपान श्रद्धालुओं को करा गया.
बता दें कि इस यज्ञ का आयोजन जगतगुरु श्री श्री 1008 श्री बिहारी जी महाराज के सानिध्य में किया गया है. कथा श्रवण करने के लिए दूर दराज से लोग पहुंच रहे हैं. कथा श्रवण करने पहुंचे पंडित श्री चंद्रमणि तिवारी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से पापों का नाश, दीर्घायु, आरोग्य, धन-समृद्धि, पितृ-दोष मुक्ति, ग्रह दोष निवारण और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है; यह जन्म-जन्मांतर के पुण्य जगाकर आत्मिक शांति और भगवान से मिलन कराती है, जिससे जीवन सफल हो जाता है और मनुष्य सभी सांसारिक दुखों से मुक्त होकर परमधाम प्राप्त करता है।
कथा श्रवण के प्रमुख फल:
पाप मुक्ति और पुण्य लाभ: यह कथा सभी पापों का नाश करती है और अनगिनत पुण्यों का संचय कराती है, जो कई जन्मों के पुण्य से ही सुनने को मिलती है.
आरोग्य और दीर्घायु: अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, लंबी और स्वस्थ आयु प्राप्त होती है, और शरीर स्वस्थ रहता है।
धन-समृद्धि और शांति: घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है, धन-धान्य और सुख-शांति बनी रहती है, और लक्ष्मी-विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
ग्रह-दोष और पितृ दोष निवारण: सभी ग्रहों का अशुभ प्रभाव खत्म होता है और पितरों को शांति मिलती है।
आत्मिक शांति और ईश्वर प्राप्ति: मन शांत होता है, हृदय निर्मल होता है, और भगवान श्रीकृष्ण की सच्ची अनुभूति होती है।
ज्ञान और वैराग्य: अज्ञानता दूर होती है, सोया हुआ ज्ञान और वैराग्य जागृत हो जाते हैं, और संसार से मोह कम होता है।
इच्छा-पूर्ति और मोक्ष: यह कथा कल्पवृक्ष के समान है, जो सभी इच्छाओं को पूरा करती है और अंत में साधक को परमधाम की प्राप्ति कराती है।
प्रेत पीड़ा से मुक्ति: यह मृत आत्माओं का भी कल्याण करती है, जिससे जीवितों को और भी लाभ होता है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
कथा का पूर्ण फल तभी मिलता है जब श्रोता के मन में ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार न हो, हृदय निर्मल हो।
कलयुग में भागवत कथा स्वयं भगवान का रूप है और इसे सुनना अत्यंत दुर्लभ माना गया है, जिसके लिए देवता भी तरसते हैं।
आज कि कथा कि शुरुआत करते हुए जगतगुरु महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य के दुखों का मूल कारण संसार के छह विकार—काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर हैं. जब तक इन विकारों से मुक्ति नहीं मिलती, तब तक जीवन में शांति संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि संतों की संगति और पवित्र ग्रंथों का अध्ययन ही इन विकारों से मुक्त होने का सशक्त माध्यम है.




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