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प्रसव से संबंधी सभी जटिलताओं को दूर करने के लिये संस्थागत प्रसव जरूरी,परिवार नियोजन के स्थायी साधन अपनाने पर प्रसूति को मिलता है सरकारी लाभ..




- सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव सुविधा सुदृढ़ होने के बाद संस्थागत प्रसव के प्रति बढ़ा है लोगों का भरोसा.
- दक्ष स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा प्रसव करने के मामले 7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ 90.6 तक पहुंचे.



एक्सप्रेस न्यूज़, बक्सर:  जिले में मातृ-शिशु मृत्युदर को कम करने के लिये सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की सेवाओं व सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है.जिसकी बदौलत न केवल संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है, बल्कि लोगों को भी भरोसा बढ़ा है. घरेलू प्रसव की तुलना में संस्थागत प्रसव जच्चा-बच्चा के बेहतर देखभाल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. साथ ही, अब सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव से जुड़ी तमाम जटिलताओं से निपटने व माता व शिशु के जीवन को बचाने के लिये बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं.
संस्थागत प्रसव के मामलों में हुई है बढ़ोत्तरी : 
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस) 5 के अनुसार जिले में प्रसव संबंधी 89.5 फीसदी मामले संस्थागत रूप से निपटाये जा रहे हैं. जो पहले 81.6 हुआ करती थी. वहीं, दक्ष स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा प्रसव करने के मामलों में भी 7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ 90.6 हो चुकी है. साथ ही, गृह आधारित प्रसव कराने की संख्या  3.7 से 2.8 हो चुकी है. सबसे जरूरी बात यह रही की कोरोना काल के दौरान भी स्वास्थ्य इकाईयों में निर्बाध प्रसव सेवाएं प्रदान की जाती रही. उल्लेखनीय है कि जिले के सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, रेफरल अस्पताल सहित जिले के सभी पीएचसी में प्रसव सेवाओं का संचालन किया जा रहा है. इसके अलावा विभिन्न प्रखंडों के लगभग हेल्थ वेलनेस सेंटर्स पर भी प्रसव संबंधी जरूरी सेवाओं का संचालन किया जा रही हैं.



लाभुकों को दी जाती है आर्थिक सहायता :
सदर अस्पताल के प्रबंधक दुष्यंत कुमार सिंह ने बताया, पूर्व की अपेक्षा प्रसव के लिए अस्पताल आने पर माताएं खुद को बेहद सुरक्षित महसूस करती हैं. विशेष परिस्थितियों में जच्चा व बच्चा की सेहत पर विशेष ध्यान दिया जाता है. अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूति को आर्थिक सहायता के रूप में ग्रामीण क्षेत्र की प्रसूतियों को 1400 रुपये व शहरी इलाके की प्रसूतियों को 1000 रुपये आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है. प्रसव के तुरंत बाद परिवार नियोजन के स्थायी साधन अपनाने पर प्रसूति को 2000 रुपये व प्रसव के सात दिन बाद नियोजन कराने पर आर्थिक सहायता के रूप में 3000 रुपये दिये जाने का प्रावधान है. संस्थागत प्रसव से बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनाने संबंधी जटिलता भी खत्म हो जाती हैं.
डीपीएम संतोष कुमार ने बताया, प्रसूति गृह व ऑपरेशन कक्ष में देखभाल में गुणात्मक सुधार के उद्देश्य के लिए लक्ष्य कार्यक्रम के तहत पहले चरण में सदर अस्पताल बक्सर, डुमरांव अनुमंडल अस्पताल तथा सिमरी व ब्रह्मपुर के एक एक स्वास्थ्य संस्थानों का चयन किया गया है. इसके तहत प्रसूति कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, व प्रसुति संबंधी गहन देखभाल इकाईयों आईसीयू में गर्भवती महिला व नवजात के विशेष देखभाल संबंधी तमाम इंतजाम सुनिश्चित कराया जा रहा है. उन्होंने बताया, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. एएनएम व आशा सामुदायिक स्तर पर हमेशा लोगों के संपर्क में होती हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं व उसके परिवार को कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच के प्रेरित करती हैं.


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